JNU के 82 व‍िदेशी छात्रों की राष्ट्रीयता का ही पता नहीं, RTI में खुलासा

नई द‍िल्ली। JNU में सरकारी विरोधी प्रदर्शनों के बीच यूनिवर्सिटी को लेकर RTI के जर‍िये बड़ी लापरवाही सामने आई है कि यहां पढ़ रहे 82 छात्र किन देशों के हैं, जेएनयू प्रशासन को ये ही नहीं पता। दरअसल, JNU में भारत के अलावा 48 देशों के 301 विदेशी छात्र-छात्राएं भी पढ़ते हैं। RTI (सूचना के अधिकार) के तहत विदेशी छात्रों को विवरण मांगा गया था, जिसके जवाब में JNU प्रशासन की ओर से बताया गया कि उन्हें 82 छात्रों के देश के बारे में जानकारी नहीं है।

कभी NRC ,कभी CAA, कभी धारा 370 तो कभी मोदी सरकार की नीतियों के फैसलों पर राजनीतिक अखाड़ा बन चुकी JNU यूनिवर्सिटी की एक बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। यर खुलासा एक RTI के जरिये हुआ है। RTI में मिली जानकारी के अनुसार JNU यूनिवर्सिटी में लगभग 41 तरीके के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे है जिनमें कुल 48 देशों के कुल 301 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। लेकिन 82 छात्रों की राष्ट्रीयता क्या है ये यूनिवर्सिटी को पता नहींं है।

यूनिवर्सिटी ने बताया कि अफगानिस्तान,कनाडा,जापान, सीरिया,बांग्लादेश, कोरिया, अमेरिका सहित कुल 48 देशों के छात्र पढ़ रहे है लेकिन यूनिवर्सिटी को 82 छात्रों के बारे में नही पता की ये छात्र किस देश के है। ऐसे में अब ये सवाल खड़े हो रहे है कि ये छात्र कौन है जिनकी जानकारी यूनिवर्सिटी के पास नही है?

राजस्थान में कोटा के सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत स्वामी ने RTI लगाई है जिसमे उन्होंने जानकारी मांगी थी कि कुल कितने छात्र यूनिवर्सिटी में, किस किस देश के है। इनमें पूछा गया था कि JNU में कितने छात्र पढ़ रहे हैं, किस-किस प्रोग्राम में कितने स्टूडेंटस हैं, कितने विदेशी स्टूडेंटस हैं और वे किस-किस देश से आए हैं?

इसका जवाब बेहद चौंकाने वाला मिला। यूनिवर्सिटी को 301 विदेशी छात्रों में से 82 के बारे में नहीं पता कि ये किस देश से आये है? ऐसे में अब RTI एक्टिविस्ट सुजीत स्वामी की नरेंद्र मोदी सरकार से मांग है कि ऐसे छात्रों की जांच होनी चाहिए कि ये कहाँ से है और यहां कब से पढ़ रंहें है?

यूनिवर्सिटी की ओर से 14 जनवरी को निदेशक संजीव कुमार ने सवालों के जवाब दिए। बताया गया कि 82 छात्रों के बारे में पता नहीं है कि वे किस देश के हैं। जेएनयू प्रशासन ने बताया कि 48 देशों के 301 विदेश छात्र-छात्राएं जेएनयू में पढ़ रहे हैं। जिन 82 छात्रों की नागरिकता पता नहीं है, उनके नामों के आगे ‘नॉट अवेलेबल’ लिखा गया है। ये विदेशी छात्र 78 अलग-अलग कोर्स में पढ़ रहे हैं।

बहरहाल, इस खुलासे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि इन स्टूडेंट्स को प्रवेश कैसे दे दिया गया? यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। प्रवेश देते समय इनकी राष्ट्रीयता की जानकारी क्यों नहीं ली गई? कहीं ऐसे ही बाहरी तत्वों की वजह से जेएनयू बदनाम नहीं हो रहा?

– एजेंसी

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